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Showing posts from January, 2020

माँ मैं पढूंगा माँ

माँ मैं पढूंगा माँ , मैं पढूंगा माँ  पंकज ऐसा बोलते  बोलते ना जाने कितने गिलास शराब पी चूका। दिल्ली की सर्दी भारतीय प्रौद्योगकी संसथान की जानलेवा क्लास दोनों का असर उसपे जवानी की उफान , अब पंकज किसपे ध्यान दे उसकी सबसे बड़ी दुविधा थी। पिछले (हमारा प्रथम) सेमेस्टर के  अंको के हिसाब से वो क्लास में सबसे पीछे था।  पंकज की ढेर सारी खूबियों में सबसे ऊपर था, चाहे हालात  कितने भी गंभीर क्यों ना हो सबसे पहले मस्ती का इंतजाम होना चाहिए। इंजीनियरिंग के सुरुवाती दिनों का मेरा सबसे पहला दोस्त वही था।  सायद कभी पढाई को तवज्जो न देने वाले दोस्त बनाने की मेरी पुराणी आदत यहां भी मेरा पीछा नहीं छोड़ने वाली थी। इसको पढ़ कर ना जाने मेरे कितने करीबी दोस्तों को झटका जरूर लगेगा पर सायद वो गर्वान्भित  भी महसूस करे।  पर हमे सायद अब तक ये समझ लेना चाहिए की किसी की जिंदिगी की अहमियत वह कितनी किताबे चाट चूका है उसपे निर्भर नहीं करती।  यकीं मानिये मेरे देश के पचास प्रतिसत से ज्यादा लोग आज भी स्कूल नहीं जाते और उनकी जिंदगी में उत्साह और उमंग की कोई कमी नहीं है।...